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الترجمة الهندية

ترجمة معاني القرآن الكريم للغة الهندية ترجمها مولانا عزيز الحق العمري، نشرها مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف. عام الطبعة 1433هـ.

1- ﴿بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ إِذَا السَّمَاءُ انْفَطَرَتْ﴾


जब आकाश फट जायेगा।

2- ﴿وَإِذَا الْكَوَاكِبُ انْتَثَرَتْ﴾


तथा जब तारे झड़ जायेंगे।

3- ﴿وَإِذَا الْبِحَارُ فُجِّرَتْ﴾


और जब सागर उबल पड़ेंगे।

4- ﴿وَإِذَا الْقُبُورُ بُعْثِرَتْ﴾


और जब समाधियाँ (क़बरें) खोल दी जायेंगी।

5- ﴿عَلِمَتْ نَفْسٌ مَا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ﴾


तब प्रत्येक प्राणी को ज्ञान हो जायेगा, जो उसने किया है और नहीं किया है।[1]

6- ﴿يَا أَيُّهَا الْإِنْسَانُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ الْكَرِيمِ﴾


हे इन्सान! तुझे किस वस्तु ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?

7- ﴿الَّذِي خَلَقَكَ فَسَوَّاكَ فَعَدَلَكَ﴾


जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे संतुलित बनाया।

8- ﴿فِي أَيِّ صُورَةٍ مَا شَاءَ رَكَّبَكَ﴾


जिस रूप में चाहा बना दिया।[1]

9- ﴿كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِالدِّينِ﴾


वास्तव में तुम प्रतिफल (प्रलय) के दिन को नहीं मानते।

10- ﴿وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَافِظِينَ﴾


जबकि तुमपर निरीक्षक (पासबान) हैं।

11- ﴿كِرَامًا كَاتِبِينَ﴾


जो माननीय लेखक हैं।

12- ﴿يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ﴾


वे जो कुछ तुम करते हो, जानते हैं।[1]

13- ﴿إِنَّ الْأَبْرَارَ لَفِي نَعِيمٍ﴾


निःसंदेह, सदाचारी सुखों में होंगे।

14- ﴿وَإِنَّ الْفُجَّارَ لَفِي جَحِيمٍ﴾


और दुराचारी नरक में।

15- ﴿يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ﴾


प्रतिकार (बदले) के दिन उसमें झोंक दिये जायेंगे।

16- ﴿وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ﴾


और वे उससे बच रहने वाले नहीं।[1]

17- ﴿وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ﴾


और तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?

18- ﴿ثُمَّ مَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ﴾


फिर तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?

19- ﴿يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِنَفْسٍ شَيْئًا ۖ وَالْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِلَّهِ﴾


जिस दिन किसी का किसी के लिए कोई अधिकार नहीं होगा और उस दिन सब अधिकार अल्लाह का होगा।[1]

الترجمات والتفاسير لهذه السورة: