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किताबों पर ईमान

الهندية - हिन्दी
المؤلف अताउर्रहमान अब्दुल्लाह सईदी ، अताउर्रहमान ज़ियाउल्लाह
القسم دروس ومحاضرات
النوع مرئي
اللغة الهندية - हिन्दी
المفردات الإيمان بالكتب
किताबों पर ईमानः इस वीडियो में इस्लाम के स्तंभों में से एक स्तंभ ’किताबों पर ईमान’ का उल्लेख किया गया है। और वह इस बात की दृढ़ता पूर्वक पुष्टि करना है कि अल्लाह तआला ने मनुष्यों पर अनुकम्पा करते हुए उनके मार्गदर्शन के लिए अपने रसूलों पर पुस्तकें अवतरित की हैं ताकि इनके द्वारा वह लोक और परलोक में कल्याण और सौभाग्य प्राप्त करें। पुस्तकों पर ईमान लाने में चार चीज़ें सम्मिलित हैं 1- इस बात पर ईमान लाना कि वह पुस्तकें वास्तव में अल्लाह की ओर से अवतरित हुई हैं। 2- उन में से जिन पुस्तकों के नाम हमें मालूम हैं उन पर उनके नाम के साथ ईमान लाना, उदाहरण स्वरूप क़ुर्आन करीम जो हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम  पर अवतरित हुआ, तौरात जो मूसा पर अवतरित हुई, इन्जील जो ईसा पर अवतरित हुई और ज़बूर जो दाऊद  पर अवतरित हुई, और जिन पुस्तकों के नाम हमें ज्ञात नहीं उन पर सार रूप से ईमान लाना। 3- उन पुस्तकों की सहीह सूचनाओं की पुष्ठि करना, जैसेकि क़ुर्आन की (सारी) सूचनायें तथा पिछली पुस्तकों की परिवर्तन और हेर फेर से सुरक्षित सूचनायें। 4- उन पुस्तकों में से जो आदेश निरस्त (मंसूख) नहीं किए गये हैं उन पर अमल करना और उन्हें प्रसन्नता पूर्वक स्वीकार कर लेना, चाहे उनकी हिक्मत हमारी समझ में आये या न आये, पिछली समस्त आसमानी पुस्तकें क़ुर्आन करीम के द्वारा निरस्त हो चुकी हैं। इसी तरह पुस्तकों पर ईमान लाने के कुछ फायदों का उल्लेख किया गया है।

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किताबों पर ईमान
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