الواحد
كلمة (الواحد) في اللغة لها معنيان، أحدهما: أول العدد، والثاني:...
झुठलाया समूद तथा आद (जाति) ने अचानक आ पड़ने वाली (प्रलय) को।
फिर समूद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये अति कड़ी ध्वनि से।
तथा आद, तो वे ध्वस्त कर दिये गये एक तेज़ शीतल आँधी से।
लगाये रखा उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरन्तर, तो आप देखते कि वे जाति उसमें ऐसे पछाड़ी हुई है, जैसे खजूर के खोखले तने।[1]
और किया यही पाप फ़िरऔन ने और जो उसके पूर्व थे तथा जिनकी बस्तियाँ औंधी कर दी गयीं।
उन्होंने नहीं माना अपने पालनहार के रसूल को। अन्ततः, उसने पकड़ लिया उन्हें, कड़ी पकड़।
हमने, जब सीमा पार कर गया जल, तो तुम्हें सवार कर दिया नाव[1] में।
ताकि हम बना दें उसे तुम्हारे लिए एक शिक्षाप्रद यादगार और ताकि सुरक्षित रख लें इसे सुनने वाले कान।
फिर जब फूँक दी जायेगी सूर (नरसिंघा) में एक फूँक।
और उठाया जायेगा धरती तथा पर्वतों को, तो दोनों चूर-चूर कर दिये जायेंगे[1] एक ही बार में।
तथा फट जायेगा आकाश, तो वह उस दिन क्षीण निर्बल हो जायेगा।
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उठाये होंगे आपके पालनहार के अर्श (सिंहासन) को अपने ऊपर उस दिन, आठ फ़रिश्ते।
उस दिन तुम अल्लाह के पास उपस्थित किये जाओगे, नहीं छुपा रह जायेगा तुममें से कोई।
फिर जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र दायें हाथ में, वह कहेगाः ये लो मेरा कर्मपत्र पढ़ो।
मुझे विश्वास था कि मैं मिलने वाला हूँ अपने ह़िसाब से।
(उनसे कहा जायेगाः) खाओ तथा पियो आनन्द लेकर उसके बदले, जो तुमने किया है विगत दिनों (संसार) में।
और जिसे दिया जायेगा उसका कर्मपत्र उसके बायें हाथ में, तो वह कहेगाः हाय! मुझे मेरा कर्मपत्र दिया ही न जाता!
फिर उसे एक जंजीर जिसकी लम्बाई सत्तर गज़ है, में जकड़ दो।
और वह किसी कवि का कथन नहीं है। तुम लोग कम ही विश्वास करते हो।
और न वह किसी ज्योतिषी का कथन है, तुम कम की शिक्षा ग्रहण करते हो।
और यदि इसने (नबी ने) हमपर कोई बात बनाई[1] होती।
तथा वास्तव में हम जानते हैं कि तुममें कुछ झुठलाने वाले हैं।
अतः, आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महिमावान पालनहार के नाम की।